प्रथम स्वछंद यात्रा — साईकिल पर

प्रथम परवाज़ के यह कुछ क्षण हैं जिन्हें-हमारा तो कहना ही क्या है-पाठकगण भी यात्रा-वृतांत की समाप्ति के उपरांत भुला नहीं सकेंगे। चलिये चल पड़िऐ कुछ कदम मेरे साथ, एक ऐसे सफर पर जो अब से साढे पंद्रह बरस पुराना है मगर ताज़गी जैसे कल ही की लिऐ हुऐ है। एक नवतरुण की पहली उड़ान का सफ़र, पहले दुस्साहस की बात और घुमक्कड़ी को आहुत घर से निकल भागने की कहानी…

सितंबर 06, 2002
रात दस बजे।
गढ़ मिरकपुर, हरियाणा
"यार पानी से भरे इन खेतों में रुककर गलती कर दी। ये मच्छर तो मेरा कत्ल करने पर उतारु हैं।": खेतों में बने कोठे में।


सितंबर 07, 2002
शाम सात बजे।
दाहा, उत्तर प्रदेश
"यहीं आसपास एक चौपाल बताई गई है। क्या आप बता सकते हैं कि किस तरफ है? हमें रात काटनी है।": मैं
"ये सामने भी एक चौपाल है, पर वहां खाट-चारपाई कुछ नहीं। ऐसी बारिश में, टपकती छत के नीचे कैसे रात गुजारोगे। अपनी साइकिल यहीं अंदर ले आओ।": दाहा गांव में एक परिवार का मुखिया।


सितंबर 09, 2002
"तुम्हें काम देना हो तो बताओ। नहीं तो हम आगे चलते हैं।": मैं
"इतनी अकङ! बातचीत से जाट नजर आते हो।": ज्वालापुर में श्रृद्धानंद चौक के पास, मारुति सर्विस सेंटर का मालिक।


सितंबर 11, 2002
सुबह दस बजे
"कैसे पैसे? भाग जाओ। पंद्रह दिन काम करो, तब पैसे मिलेंगे।": ज्वालापुर में निर्माणाधीन इमारत का खंजाची।


सितंबर 15, 2002
रात एक बजे
मंगोलपुरी पार्क, दिल्ली
"ऐ, उठो भागो यहाँ से! देखते नहीं भगवान का दरबार लगा है। तुम यहाँ नहीं सो सकते।": भजन-कीर्तन और जगराता पार्टी का नुमाइंदा।

अ. प्रथम परवाज़ (हरिद्वार साईकिल यात्रा)
आ. प्रथम परवाज़ (हरिद्वार साईकिल यात्रा) — भाग-एक
इ. प्रथम परवाज़ (हरिद्वार साईकिल यात्रा) — भाग-दो
ई. प्रथम परवाज़ (हरिद्वार साईकिल यात्रा) — भाग-तीन
उ. प्रथम परवाज़ (हरिद्वार साईकिल यात्रा) — भाग-चार
ऊ. प्रथम परवाज़ (हरिद्वार साईकिल यात्रा) — भाग-पाँच
ऋ. प्रथम परवाज़ (हरिद्वार साईकिल यात्रा) — भाग-छह
ए. प्रथम परवाज़ (हरिद्वार साईकिल यात्रा) — भाग-सात
ऐ. प्रथम परवाज़ (हरिद्वार साईकिल यात्रा) — भाग-आठ

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