वैष्णों देवी यात्रा – कटरा से भैंरो मंदिर

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रात डेढ बजे के लगभग ट्रेन में सवार होने के बाद हम सारे सो गऐ थे। और जब सवेरे आँख खुलीं तो किला रायपुर निकल रहा था। किला रायपुर, पंजाब का यह गांव दुनियां में मशहूर है। इसकी मशहूरी की ख़ास वजह है यहां सालाना होने वाला खेल महोत्सव। आम मनोरंजक खेलों से लेकर साहस भरे अनगिनत खेलों का आयोजन किया जाता है। जांबाज सिक्ख लङाकों का प्रदर्शन देखते ही बनता है। ख़ैर किला रायपुर को फिर कभी के लिऐ रख छोङते हैं और वैष्णों माई की अपनी यात्रा पर आगे बढते हैं। जागने के बाद पहला बङा स्टेशन आया- लुधियाना। यह शहर किसी परिचय का मोहताज नहीं है। लुधियाना उत्तर रेलवे का बहुत बङा जंक्शन है। यहां से एक लाईन चंडीगढ की ओर जाती है। एक लाईन जाती है हरियाणा के जाखल की ओर, जिससे हम आऐ हैं। फाज़िल्का और अटारी के लिऐ भी यहां से रेलवे लाईन जाती हैं। ये लाईनें भारत-पाकिस्तान बॉर्डर की ओर जाती हैं। अटारी तो आप जानते ही होंगें। अटारी वाली लाईन वाघा होते हुऐ सीमा पार करके आगे पाकिस्तान में लाहौर तक भी जाती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसी लाईन पर वर्ष 2000 के दशक में समझौता एक्सप्रेस चलाई थी। लुधियाना से ही एक सिंगल ट्रेक पंजाब के एक और शहर लोहिया खास की ओर जाता है।

कामाख्या देवी मन्दिर, गुवाहाटी (शिलांग यात्रा - पाँचवां दिन)

बरसों से चले आ रहे धार्मिक कलह को आगे बढाने का मेरा यहां कोई इरादा नहीं है। अगर किसी की भावनाऐं आहत हों तो मुझे माफ़ कीजिऐगा, लेकिन स्थापित सत्य से कोई भी इसांन, चाहे वो किसी भी मजहब से ताल्लुक रखता हो, मुकर नहीं सकता है। हिन्दु धर्म में अन्य धर्मों की तरह भले ही बहुत से अंधविश्वास और कुरीतियां हो लेकिन युगों से फल-फूल रही इस सनातन विचारधारा ने कुछ ऐसे मापदंडों, नियमों और रीतियों-नीतियों को विकसित किया है जिनका यदि दृढता के पालन किया जाऐ तो जीवन के चारों आश्रम बहुत सहजता से व्यतीत हो जाऐगें, बेखटके। यकीनन इन्हें जीवन के कुशल संचालन हेतु ही बनाया गया है जो यदि टुटते हैं तो प्रतिफल के रुप में दुख ही मिलता है, फिर चाहे ये भगवान से टुटें या इंसान से। हिन्दु धर्म के अनेक नियमों में वे कसम भी शामिल हैं जो पडिंत महाराज आपको विवाह के फेरों की रस्म के समय खिलाता है। याद कीजिऐ इनमें पत्नी को एक कसम खिलाई जाती है कि अपने पति की आज्ञा के बिना वो कहीं नहीं जाऐगी यहां तक कि मायके भी नहीं। खटपट शुरु ही तब होती है जब पति-पत्नी इन खाई हुई कसमों की उल्टी शुरु कर देते हैं अर्थात इनका पालन नहीं करते। इंसानों का हाल तो आप सर्वत्र देख ही रहे हैं लेकिन जब ईश्वर तक इन नियमों को तोङते हैं तो रिज़ल्ट क्या निकलते हैं इसका एक प्रत्यक्ष प्रमाण तो भारतीय उपमहाद्वीप में जगह-जगह बिखरे शक्तिपीठ ही हैं।