स्पीति जाने के लिये मार्गदर्शिका (वाया शिमला-किन्नौर)

शिमला-किन्नौर से होकर स्पीति जाने के लिये मार्गदर्शिका विस्तृत रुप में इस पेज पर नीचे प्रकाशित की गई है। संपूर्ण टिप्स वाले पेज हेतू यहां क्लिक करें। मनाली से काजा वाले रुट के लिये यहां क्लिक करें
  1. कब जायें 
  2. कैसे जायें 
  3. यात्रा प्लान 
  4. दर्शनीय स्थलों की सूची 
  5.  रात्रि-विश्राम



1. कब जायें: शिमला से काजा की ओर जाने वाला मार्ग लगभग साल-भर खुला रहता है, इसलिये कभी भी जाया जा सकता है। अक्तूबर-नवंबर के बाद बर्फबारी शुरु हो जाती है जिससे स्पीति बर्फ के आगोश में समा जाती है। इसी बर्फबारी के कारण शिमला-काजा मार्ग भी दो-तीन दिन के लिये बंद हो जाता है। जून के बाद बर्फ पिघलने लगती है पर मानसून के कारण भू-स्खलन होने लगते हैं, जिससे अनिश्चित समय के लिये रोड बंद हो सकता है। मध्य अगस्त से मध्य अक्तूबर तक शिमला-काजा सङक पूरी तरह अनुकूल होती है। इस वक्त में भी पूरा लुत्फ उठाने के लिये सितंबर ही सर्वोत्तम है। इस महीने में स्पीति के साथ-साथ किन्नौर के भी लगभग हर एक दर्शनीय स्थलों के मार्ग खुले मिलते हैं। बरसात की संभावना कम से कम होती है और मौसम सुहावना बना रहता है।

2. कैसे जायें: शिमला तक पहुँचने में कोई दिक्कत नहीं है। यह रेल और सङक मार्गों द्वारा शेष भारत से बहुत अच्छी तरह जुङा हुआ है। शिमला से आगे काजा की ओर जाने के लिये सङक मार्ग ही एकमात्र विकल्प है। शिमला से काजा की दूरी है 450 किलोमीटर। शिमला से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 22 पर चलना होता है और उसके बाद काजा तक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 505 पर। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 22 को हिन्दुस्तान-तिब्बत रोड भी कहा जाता है। कभी यह मार्ग भारत और तिब्बत के बीच व्यापारिक संबंधों का सूत्र होता था। आज भी चीन के साथ व्यापार के लिये सङक मार्ग के रुप में इसका प्रयोग होता रहता है। कृपया ध्यान दें कि भारत सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों की नबंरिंग बदल रही है जिससे भविष्य में 22 और 505 को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 05 के रुप में ही जाना जायेगा। इसकी शुरुआत हो चुकी है।

3. यात्रा प्लान: अगर आप निजी टैक्सी या अपने वाहन से जाते हैं तो शिमला से काजा का रोड मैप नीचे दिया हुआ है। निजी टैक्सी का किराया 2500 से 3500 रुपये प्रतिदिन हो सकता है। लेकिन अगर आप सार्वजनिक परिवहन से जाते हैं तो सरकारी बसों का शेड्यूल ये रहा नीचे।

(क) शिमला से रामपुर/सराहन: शिमला से लगभग हर एक घंटे के अंतराल पर रामपुर के लिये हिमाचल सरकार की बस सेवा है। इस रुट पर कुछ निजी ऑपरेटरों की बसें भी चलती हैं। रामपुर से सराहन बीच हर दो-ढाई घंटे के अंतराल पर बस चलती है। रामपुर तक सीधे दिल्ली से भी बसें चलती हैं।

(ख) रामपुर से सांगला/रिकांगपिओ: अगर किन्नौर की घाटियां देखनी हों तो रामपुर से सांगला की बस पकङ सकते हैं। रामपुर से सांगला के लिये दोपहर तक कुछ बसें चलती हैं। सांगला से आगे किन्नौर के अंतिम गांव छितकुल तक भी बस जाती हैं। सांगला से छितकुल के लिये दिन भर में दो बसें चलती हैं। सांगला से रिकांगपिओ जाने के लिये हर दो घंटे में बसें चलती हैं।
यदि सांगला/छितकुल छोङना हो तो रामपुर से सीधे ही रिकांगपिओ की बस पकङ सकते हैं। रामपुर और रिकांगपिओ के बीच बसें दिन भर कुछ घंटों के अंतराल पर चलती रहती हैं। यहां तक कि रिकांगपिओ और दिल्ली के बीच भी हर रोज अलख सवेरे सीधी बस सेवा है।

(ग) रिकांगपिओ से कल्पा/रोघी: कल्पा और उससे आगे रोघी दोनों ही के लिये रिकांगपिओ से सारा दिन बसें चलती हैं। स्पीति की ओर रुख करने से पहले शरीर के अनुकूलन के लिये कल्पा व रोघी जा सकते हैं। ये दोनों जगहें रिकांगपिओ से उपर की ओर हैं जबकि स्पीति के लिये पिओ से वापस नीचे उतरना होता है।

(घ) रिकांगपिओ से काजा: इन दोनों ही जगहों के बीच पूरे दिन में एकमात्र बस है जो सवेरे छह बजे के आसपास निकलती है। यह बस दोपहर बाद तक ताबो पहुँचा देती है और दिन ढले काजा पहुँचती है। यदि यह बस छूट गई तो आपके पास निजी सूमो अथवा जीप से यात्रा का विकल्प बचता है। एक अंतिम विकल्प के रुप में रिकांगपिओ से समदू के बीच चलने वाली बस भी है जो रिकांगपिओ से बारह-एक बजे के आसपास निकलती है। इस बस के द्वारा आप नाको अथवा चांगो तक पहुँच सकते हैं और अगले दिन रिकांगपिओ से काजा जाने वाली बस यहीं से पकङ सकते हैं। इस बस से यात्रा करने का लाभ यह होगा कि आप नाको घुम सकेंगें जो अपनी झील और चट्टानों पर उकेरी गई कलाकृतियों के लिये प्रसिद्ध है। नाको से 25 किलोमीटर आगे चांगो अपने खास सेबों के लिये प्रसिद्ध है। चांगो में एक बौद्ध मोनेस्ट्री भी है।

Spiti Valley Guide Map via Shimla Kinnaur
स्पीति वैली के लिये रुट मैप (वाया शिमला-किन्नौर)
4. दर्शनीय स्थलों की सूची: शिमला की ओर से स्पीति जाने वाले मार्ग पर अनेक रमणीय और दर्शनीय स्थल मौजूद हैं। चलिये समुंद्र तल से इन स्थानों की उंचाई देखते हुये इनके प्रमुख आकर्षणों पर एक नजर डालते हैं। दर्शनीय स्थलों के संपूर्ण विवरण के लिये “हिमाचल मोटरसाईकिल यात्रा” शीर्षक के साथ इसी ब्लॉग पर प्रकाशित किया गया यात्रा-वृतांत पढें।
(क) शिमला जिला
शिमला शहर (2200 मीटर)- मॉल रोड (रिज), जाखू मंदिर, राष्ट्रपति निवास, टॉय-ट्रेन, अन्नानडेल मैदान, समर हिल और अनेक मंदिर आदि
कुफरी (2290 मीटर)- फागू, इंदिरा टूरिस्ट पार्क, महासू चोटी, हिमालयन नेचर पार्क
नारकंडा (2730 मीटर)- जाउ बाग, तनू-जुब्बार लेक, हाटू चोटी, विष्णुपाद मंदिर और दूर तक फैले सेब बागान
सराहन (2300 मीटर)- भीमाकाली मंदिर, दारन घाटी, बर्ड पीक, बुशैहर राजाओं का महल आदि

(ख) किन्नौर जिला
नीचार (2000 मीटर)- उखा देवी मंदिर और हिमालय की प्राकृतिक खूबसूरती
सांगला घाटी- सांगला गांव, कामरू का कामाख्या मंदिर और बुशैहर राजाओं का महल, हिमालय की प्राकृतिक खूबसूरती, बत्सेरी गांव का बद्री-नारायण मंदिर, रकछम, चिलगोजा, सेब और अखरोट के उत्पादन के लिये मशहूर
छितकुल (3400 मीटर)- तिब्बत की ओर सांगला घाटी का अंतिम आबाद भारतीय गांव, चरांग और बस्पा घाटियों के लिये आधार शिविर
रिकांगपिओ (2300 मीटर)- किन्नौर का जिला मुख्यालय
कल्पा (2800 मीटर)- बेहद खूबसूरत और छोटा सा कस्बा, किन्नौर-कैलाश (शिवलिंग), जोरकंडेन और सरोंग चोटियों के स्पष्ट दर्शन यहीं से होते हैं, सेब और आडू के बागान
रोघी (2800 मीटर)- कल्पा से सात किलोमीटर उपर एक खूबसूरत हिमालयी गांव
भाबा वैली- वांगतू से कफनू होते हुये आगे जाने पर एक सुरम्य घाटी
रोपा वैली- पोवारी से 65 किलोमीटर आगे एक और सुरम्य घाटी
पूह (2600 मीटर)- प्राचीन बौद्ध गोंपा
खाब (2400 मीटर)- हिन्दुस्तान-तिब्बत रोड का अंतिम बिंदु, स्पीति और सतलुज का संगम स्थल
नाको (2900 मीटर)- नाको झील, गोंपा, चट्टानों पर उकेरी गई कलाकृतियां (पैट्रोग्लिफ्स)
चांगो (3150 मीटर)- उत्तम किस्म के सेबों के लिये मशहूर, बौद्ध गोंपा

(ग) लाहौल-स्पीति जिला (स्पीति संभाग)
गियू (3200 मीटर)- 500 वर्ष पुरानी बौद्ध लामा की ममी के लिये प्रसिद्ध
ताबो (3100 मीटर)- 1000 वर्ष पुरानी बौद्ध मोनेस्ट्री, बौद्ध साहित्य का विपुल भंडार, हिमालय की अजंता-एलोरा के रुप में मशहूर
धनकर (3850 मीटर)- प्राचीन स्पीति राजवंश की राजधानी, धनकर गोंपा, धनकर का किला
समलिंग (अतरगू)- पिन और स्पीति नदियों का संगम स्थल
मड- पिन वैली नेशनल पार्क में अंतिम आबाद गांव जहां से एक ट्रेकिंग मार्ग पिन-पार्वती दर्रे से होकर सीधे कुल्लू तक जाता है।
काजा (3850 मीटर)- स्पीति यानि विश्व के फॉसिल पार्क का गढ है काजा। यहां से अनेक ट्रेकिंग रुट निकलते हैं, जैसे- कुल्लू की ओर, लद्दाख की ओर, केलांग की ओर तथा तिब्बत की ओर भी। सुबह सवेरे अपना सामान होटल में छोङकर आसपास के गांवों के लिये सर्किल ट्रिप पर निकल पङिये। चिच्चम, किब्बर, की-गोंपा, ताशिगंग, लांगजा, हिक्किम और कौमिक गांवों की खूबसूरती को आप एक ही दिन में सङक मार्ग द्वारा निहार सकेंगें। इन गांवों की बौद्ध संस्कृति को करीब से देखने के लिये 60 किलोमीटर की ट्रेकिंग ट्रिप भी की जा सकती है जिसके लिये कम से कम तीन-चार दिन चाहियें। हिमालय टेथिस सागर के मलबे से बनी पर्वतमाला है। आज भी काजा के चारों ओर समुंद्री अवशेष देखे जा सकते हैं।
काजा-पांगमो रोड- यह वही सङक है जो कुंजुंम पास होते हुये मनाली तक जाती है। काजा से पांगमो तक यह सङक इतने खूबसूरत नजारे पेश करती है जिन्हें आप ताजिंदगी भूल नहीं सकते। घास के बङे-बङे मैदान और उनके उस पार उंचे-उंचे पहाङ, साथ में दायें हाथ को बहती स्पीति नदी। वाह! मेरे जैसे मूढमति को भी कविताई आ जाये।

5. रात्रि-विश्राम: शिमला से काजा जाते हुये रात्रि-विश्राम के लिये होटलों की दिक्कत नहीं आने वाली। पर्याप्त मात्रा में रात को रुकने के ठिकाने मिल जायेगें। अधिक जानकारी के लिये नीचे उपलब्ध इमेज को देख डालिये।
Accommodation Availability on Shimla Kaza Road
शिमला-काजा मार्ग पर रात्रि-विश्राम के ठिकाने
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1. हिमाचल मोटरसाईकिल यात्रा (दिल्ली से नारकंडा) भाग-01
2. हिमाचल मोटरसाईकिल यात्रा (नारकंडा से कल्पा) भाग-02
3. हिमाचल मोटरसाईकिल यात्रा (कल्पा से चांगो) भाग-03
4. हिमाचल मोटरसाईकिल यात्रा (चांगो से लोसर) भाग-04
5. हिमाचल मोटरसाईकिल यात्रा (लोसर से कुल्लू) भाग-05
6. हिमाचल मोटरसाईकिल यात्रा (कुल्लू से दिल्ली) भाग-06
7. स्पीति टूर गाईड
8. स्पीति जाने के लिये मार्गदर्शिका (वाया शिमला-किन्नौर)
9. स्पीति जाने के लिये मार्गदर्शिका (वाया मनाली)

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